ब्रम्हास्त्र के रूप में ‘संघ’ का इस्तेमाल,क्या अब भी नहीं जीतेंगे टटवाल, संभावित हार को जीत में बदलने के लिए संघ को किया सक्रिय

ब्रम्हास्त्र के रूप में ‘संघ’ का इस्तेमाल,क्या अब भी नहीं जीतेंगे टटवाल, संभावित हार को जीत में बदलने के लिए संघ को किया सक्रिय

  03 Jul 2022

वीवीएस सेंगर

उज्जैन। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और सिंधिया का रोड शो और चुनावी सभाएं कराने के बाद भी उज्जैन नगर निगम चुनाव में प्रचार के मामले में बुरी तरह पिछड़ चुकी भाजपा ने मतदान के ठीक पहले ब्रह्मास्त्र के रूप में अपने आखरी शस्त्र ‘संघ’का संधान कर लिया है। अपने महापौर प्रत्याशी मुकेश टटवाल और पार्षद पद के आधे से अधिक उम्मीवारों की कमजोर स्थिति को देख भाजपा ने अपने प्रत्याशियों के पक्ष में अधिक से अधिक मतदान कराने के उद्देश्य से संघ को सक्रिय कर दिया है और बूथ लेवल का प्लान तैयार किया है।

इसके लिए बूथ लेवल पर संघ से जुड़े लोगों को माइक्रो मैनेजमेंट के काम मे लगा दिया गया है और उन्हें बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं की मॉनिटरिंग करने के साथ ही अपने अनुभव का इस्तेमाल कर अधिक से अधिक मतदाताओं (खासकर भाजपा की विचारधारा रखने वालों)
 को मतदान केंद्र तक लाकर मतदान कराने की जिम्मेदारी दे दी गई है। हर बूथ पर संघ से जुड़े ऐसे 5 से 10 लोगों को सक्रिय किया गया है। उन वार्डो में ज्यादा फोकस किया गया है जहां भाजपा प्रत्याशी या तो बागी उम्मीदवार की वजह से कमजोर है या फिर मौजूदा पार्षद टिकट कट जाने की वजह से नाराज है और बाहरी तौर पर तो बीजेपी प्रत्याशी के साथ है पर अंदर ही अंदर काट करने में लगे हैं। उज्जैन दक्षिण में ऐसी स्थिति ज्यादा है क्योंकि दक्षिण में आधा
दर्जन से अधिक भाजपा के मौजूदा पार्षदों के टिकट काट दिये गए हैं।

हालांकि उनके टिकट कटने की वजह भी है क्योंकि कुछ ने 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार की अंदरखाने कब्र खोदने की कोशिश की थी तो कुछ सामाजिक समीकरण बैठाकर उज्जैन दक्षिण से भाजपा की टिकट पर विधायक बनने का सपना देखने लगे थे। लिहाजा संगठन ने उन्हें घर बैठा दिया है और न घर का छोड़ा है और न घाट का। अब यही लोग सिर्फ दिखावे के लिए काम कर रहे हैं और नगर निगम चुनाव में या तो काम नहीं कर रहे या फिर बेमन से काम कर रहे हैं। बूथ लेवल पर सक्रिय किये गए संघ के लोग पन्ना प्रमुख और अर्ध पन्ना प्रमुख मोनिटरिंग कर रहे हैं। रोज रात में इनकी किसी के घर या दुकान में बैठकर मीटिंग्स हो रही हैं और परडे की वर्किंग की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। 
 मतदान के ठीक पहले संघ का सक्रिय होना प्रचार और जनसंपर्क के मामले में भाजपा से दस कदम आगे चल रही कांग्रेस के लिए चिंताजनक है, क्योंकि अधिकांश कांग्रेसी मामूली मनमुटाव की वजह से नाराज होकर घर बैठे हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस को नये सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत है, इसके लिए न केवल घर बैठे कांग्रेसियों को बाहर निकलना जरूरी है बल्कि उन्हें संगठन के लिए काम करने के लिए मनाने की भी जरूरत है। क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अभी तक कांग्रेस के फेवर में जाती दिख रही नगर निगम चुनाव की ये बाजी पलट भी सकती है।

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