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भूतभावन की नगरी में गूँजा गौरीनंदन गणेश का जयकारा, चैत्र मास की दूसरी जत्रा पर चिंतामण के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब

भूतभावन की नगरी में गूँजा गौरीनंदन गणेश का जयकारा, चैत्र मास की दूसरी जत्रा पर चिंतामण के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब

  03 Apr 2019

वीवीएस सेंगर

उज्जैन। भूत भावन बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में बुधवार को गौरी नंदन गणेश का जयकारा गूंजा और चैत्र मास की दूसरी जत्रा पर विश्व प्रसिद्ध भगवान चिंतामन गणेश का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहा। हजारों की संख्या में धर्मालु सुबह से ही चिंतामन गणेश मंदिर पहुंचकर मंगलमूर्ति भगवान गणेश के दर्शन किये।

दरअसल हर बुधवार को भगवान चिंतामन के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ती है लेकिन चैत्र मास के बुधवार की बात ही अलग होती है क्योंकि चैत्र मास के हर बुधवार को भगवान चिंतामन के दरबार में जत्रा का आयोजन होता है और मेला लगता है। ऐसे में न केवल उज्जैन इंदौर और आसपास के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में धर्मालु उज्जैन पहुंचते हैं।भगवान चिंतामन गणेश के दर्शन करते हैं।

यहां आपको बता दें भगवान चिंतामन गणेश का मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। यहां भगवान चिंतामन तीन रूपों चिंतामण, इच्छामन और सिद्धिविनायक के रूप में विराजित हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान राम भार्या सीता और भाई लक्ष्मण के साथ जब महाकाल बनाए वन आए तो कष्टों के निवारण के लिए माता सीता ने यहां षड विनायकों की स्थापना की थी। उन्हीं में से एक चिंतामन गणेश हैं। मंदिर परिसर में लक्ष्मण बावड़ी भी है। मान्यता है कि जब माता सीता को प्यास लगी तो उन्होंने लक्ष्मण को जल लाने को कहा। आसपास जल स्रोत ना होने कारण लक्ष्मण ने यही धरती में बाण मारकर जलधारा प्रकट की थी जो लक्ष्मण बावड़ी के नाम से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस बावड़ी के पानी का इस्तेमाल करने से रोगों से निवारण होता है। मंदिर के पुजारी शंकर गुरु के मुताबिक चूंकि चैत्र मास में फसलों की कटाई होती है और किसानों के घर नया अनाज आता है। लिहाजा चैत्र मास की हर जत्रा पर किसान अपने अनाज के एक हिस्सा लेकर भगवान चिंतामन के दरबार में आते हैं और उन्हें अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से फसलों का उत्पादन अच्छा होता है।

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