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हल्दी चंदन से उबटन कराने के बाद महाकाल ने फिर लपेटी भभूत, दोपहर में हुई भस्म आरती, सेहरा श्रृंगार के दर्शन कर धर्मालु हुए अभिभूत

हल्दी चंदन से उबटन कराने के बाद महाकाल ने फिर लपेटी भभूत, दोपहर में हुई भस्म आरती, सेहरा श्रृंगार के दर्शन कर धर्मालु हुए अभिभूत

  05 Mar 2019

■वीवीएस सेंगर
उज्जैन। शिव नवरात्रि के नौ दिनों से लगातार रोजाना हल्दी और चंदन से उबटन कराने और दूल्हा स्वरूप में सजकर अपने भक्तों को दर्शन देकर निहाल कर रहे भगवान महाकाल अपने उसी निर्गुण, निराकार और सन्यासी स्वरूप में वापस आ गए हैं। महाशिवरात्रि पर माँ पार्वती से विवाह बंधन में बंधने के साथ ही मंगलवार को भगवान भगवान ने फिर भभूत लपेट ली और अपना औगढ़ स्वरूप धारण कर लिया।

दरअसल महाशिवरात्रि के दूसरे दिन भी उज्जैन का विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहा। इस दौरान भगवान महाकाल ने अपने भक्तों को दो स्वरूपों में दर्शन दिए। सुबह से दोपहर तक राजाधिराज बाबा महाकाल दूल्हा बने रहे और अपने माथे पर फूलों का मनमोहक सेहरा सजाए रहे तो दोपहर बाद वे अपने उसी निराकार सन्यासी स्वरूप में आ गए और भस्म लपेट ली। दरअसल महाशिवरात्रि के दूसरे दिन मंगलवार को दूल्हा बने महाकाल की दोपहर में भस्म आरती की गई।

यहाँ आपको बता दें कि साल में महाशिवरात्रि के दूसरा दिन एक मात्र ऐसा दिन होता है जब भगवान महाकाल की रोजाना ब्रम्ह मुहूर्त में होने वाली भस्म आरती दोपहर में होती है। साल में सिर्फ एक दिन दोपहर में होने वाली इस भस्म आरती को लेकर भक्तों में बड़ा क्रेज होता है और बड़ी संख्या में दर्शनार्थियो को साल में एक दिन होने वाली इस भस्म आरती में शामिल होने का इंतजार रहता है। मंगलवार को महाशिवरात्रि के दूसरे दिन दोपहर में हुई भस्म आरती में इसी का नजारा दिखा। जब बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों ने साल में सिर्फ एक बार दोपहर में होने वाली भस्म आरती का आनंद लिया।इस दौरान भगवान महाकाल का दूध,दही,घी,शक्कर,शहद, भांग आदि से अभिषेक किया गया और आकर्षक श्रृंगार कर भस्म चढ़ाई गई और आरती की गई।

इससे पहले रात्रि में हुए मंगलाचरण के बाद भगवान महाकाल का फलों और फूलों से सेहरा सजाया गया और सप्त धान्य मुखौटा चढ़ाया गया। दोपहर तक हजारों की संख्या में भक्तों ने बाबा महाकाल के सेहरा स्वरूप के दर्शन किये। मान्यता है कि भगवान महाकाल के सेहरा स्वरूप के दर्शन करने और सप्त धान्य ले जाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, धन धान्य में वृद्धि होती है और सारी अड़चने दूर होकर विवाह आदि कार्य संपन्न होते हैं।

हालांकि साल में सिर्फ एक बार दोपहर में होने वाली भस्म आरती में शामिल होने के लिए मंगलवार को यहां जमकर धक्कामुक्की हुई। भस्म आरती में ज्यादा भीड़भाड़ न हो लिहाजा सुबह 10 बजे ही महाकाल मंदिर में पुलिस और प्रशासन ने रोक लगा दी और मंदिर को खाली करा लिया। इस दौरान बाद में पहुंचे कांग्रेसियों सहित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के परिवार के लोगों सहित उन दर्शनार्थियों को भी परेशान होना पड़ा जिन्होंने बकायदा आज की भस्म आरती की परमिशन ले रखी थी। लोगों ने इस बात की भी शिकायत की कि पुलिस, प्रशासन और कांग्रेसियों ने भस्म आरती में कब्जा कर लिया है।

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