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मनीष सिंह बने रहेंगे उज्जैन के कलेक्टर, लोकसभा चुनाव के चलते चुनाव आयोग ने कलेक्टर्स के तबादलों पर लगाई रोक

मनीष सिंह बने रहेंगे उज्जैन के कलेक्टर, लोकसभा चुनाव के चलते चुनाव आयोग ने कलेक्टर्स के तबादलों पर लगाई रोक

  26 Dec 2018

●MP में अब कलेक्टर सहित 65 हजार कर्मचारियों के तबादलों पर चुनाव आयोग ने लगाई रोक

भोपाल/ उज्जैन (ब्यूरो)। मध्यप्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार के गठन के बाद उज्जैन कलेक्टर मनीष सिंह के तबादले की अटकलों पर विराम लग गया है। दरअसल प्रदेश में कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार सहित 65 हजार बूथ लेवल ऑफिसरों के तबादलों पर चुनाव आयोग ने बुधवार से रोक लगा दी। ऐसे में लोकसभा चुनाव तक मनीष सिंह उज्जैन कलेक्टर बने रहेंगे या यूं कहें कि बगैर चुनाव आयोग की सहमति से राज्य सरकार उनका ट्रांसफर नहीं कर सकेगी। दरअसल लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची का काम जब तक पूरा नहीं हो जाता है, तब तक आयोग की अनुमति बिना सरकार इनमें से किसी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला नहीं कर पाएगी।
कमिश्नरों को लेकर भी यही स्थिति रहेगी, क्योंकि वे रोल ऑब्जर्वर होते हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार के लिए 25 जनवरी तक दावे-आपत्तियां लिए जाएंगे। 22 फरवरी को फाइनल मतदाता सूची का प्रकाशन होगा।

प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने बुधवार को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन करवाया। नाम जोड़ने, हटाने और सुधार के लिए दावे-आपत्तियां मतदान केंद्रों में बूथ लेवल ऑफिसर के पास जाकर 25 जनवरी तक किए जा सकेंगे। चूंकि, मतदाता सूची के शुद्धिकरण का पूरा काम जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) की अगुवाई में चलना है, इसलिए इनका तबादला बिना आयोग की इजाजत के नहीं होगा।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने बताया कि जिला निर्वाचन अधिकारी के अलावा, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी सहित मतदाता सूची के काम से सीधे जुड़े कर्मचारियों के तबादले भी बिना अनुमति नहीं हो सकेंगे। बूथ लेवल ऑफिसर अब 25 जनवरी तक 65 हजार 283 मतदान केंद्रों में कार्यालयीन समय में मौजूद रहेंगे।

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